जिले के जंगल में मौजूद है कैंसररोधी औषधीय पौधा दहीमन, विज्ञानियों ने की थी खोज, संरक्षण की है जरूरत


कोरबाअनोखी बायोडायवर्सिटी वाले कोरबा के जंगलों में एक ऐसा औषधीय पौधा-पेड़ पाया जाता है, जिसमें कैंसर की दवा छिपी है। दहीमन कही जाने वाली इस खास वनस्पति की पत्तियों और छाल में फेनोल्स, टरपेनॉइड्स, सैपोनिन्स, वोलाटाइल ऑयल, फ्लेवोनॉइड्स और ग्लाइकोसाइड्स पाए जाते हैं। इसमें थेनालिक एक्सट्रैक्ट पाया जाता है। इसमें एंटीफंगल, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी कैंसर तत्व होते हैं। इस लिहाज से यह पौधा काफी महत्त्वपूर्ण है, जिसके संरक्षण की दिशा में विशेष प्रयास किए जाने की जरूरत है। कोरबा के जंगलों में बहुगुणी क्षमता वाले दहीमन पेड़ की काफी उपलब्धता है। जरूरत है तो इसकी पहचान की। ऐसा माना जाता है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को इस पेड़ के पत्तों से ठीक किया जा सकता है। यह बात भले ही असंभव लगे, पर विज्ञान विशेषज्ञों का यही दावा है। उन्होंने इस विशेष किस्म के पौधे के संरक्षण पर जोर देने की आवश्यकता व्यक्त की है। कुछ साल पहले ही प्रदेश स्तर के विज्ञानियों ने अपनी खोज यात्रा के दौरान कोरबा के घने वन्य क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए इस पौधे को ढूंढ निकाला था। बालको से लगे ग्राम बेला से कॉफी पाइंट तक जंगल में 10 किलोमीटर की वैज्ञानिक खोज के दौरान दहीमन की मौजूदगी दर्ज की गई थी। दहीमन नाम की इस औषधीय गुणों से भरपूर वनस्पति से और भी कई बीमारियों का उपचार होता है। दहीमन के तरह के अलग-अलग अनोखे गुणों वाले 60 प्रकार के औषधीय वनस्पतियों की पहचान छत्तीसगढ़ विज्ञानसभा के विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा कोरबा के जंगलों में की जा चुकी है। कोरबा के वनों में विरल रूप में इसके पौधे विभिन्न स्थानों में पाए जाते हैं। दहीमन की पत्तियां भी अनोखी हैं। इसकी पत्तियों की कुछ विशेषताएं हैं। इनमें एक यह है कि अगर आप पत्तियों के ऊपर कुछ भी लिखेंगे, तो उसके नीचे की ओर वह लिखावट भी अपने आप उभरकर आ जाएगी। पहले के समय में गुप्तचरों द्वारा इस पत्ते पर संदेश लिख अदान-प्रदान किए जाते थे। ऐसा आज भी इन पत्तों पर साफतौर पर दिखाई देता है। इसका कारण इसमें पाए जाने वाले टैनिन और फेनोलिक तत्वों की आपसी क्रिया होती है। इस पौधे के इन गुणों की वजह से ही इसके संरक्षण की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत है।

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