गजकेसरी योग के विशेष संयोग में मनाई गई अक्षय तृतीया, बच्चों के बीच गुड्डा-गुड्डी के विवाह को लेकर रहा विशेष उत्साह

कोरबा- इस वर्ष अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को गजकेसरी योग के विशेष संयोग में मनाई गई, जिसे बेहद शुभ और फलदायी माना गया है। चंद्रमा और गुरु की स्थिति से बनने वाला यह योग धन, समृद्धि और सफलता का संकेत देता है। इसी कारण पर्व को लेकर लोगों में उत्साह दोगुना नजर आया और शहर के बाजारों में भी रौनक दिखी।
पर्व के मद्देनजर शहर के साप्ताहिक बाजारों में मटका, मिट्टी के गुड्डा-गुड्डी, मौर, छोटे कलश और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री की बिक्री खूब हुई। खासकर बच्चों के बीच गुड्डा-गुड्डी के विवाह को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों ने समूह बनाकर घर के आंगन में मंडप सजाया और पारंपरिक तरीके से मिट्टी के गुड्डा-गुड्डी का विवाह रचाया। इस दौरान चूलमाटी, तेल, मायन जैसी रस्में निभाई गई। यह परंपरा न केवल बच्चों के मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक मूल्यों से भी जोड़ती है। इस आयोजन में बड़े भी शामिल होकर बच्चों का उत्साह बढ़ाते हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है और इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का अक्षय फल मिलता है। इस वर्ष गजकेसरी योग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया। उन्होंने बताया कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत बिना मुहूर्त देखे की जा सकती है, क्योंकि इसे देवलग्न माना जाता है। किसान वर्ग के लिए भी यह दिन खास होता है। गांवों में किसान ठाकुर देवता की पूजा कर दोना में धान अर्पित करते हैं और उसी धान को खेतों में छिडक़कर नई फसल की शुरुआत करते हैं। यह परंपरा खेती-किसानी से जुड़ी आस्था और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।

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