
कोरबा, छत्तीसगढ़। कोरबा के स्थानीय मूर्तिकारों ने आरोप लगाया है कि वे पिछले कई वर्षों से मिट्टी की मूर्तियों का निर्माण करते आ रहे हैं और मूर्ति निर्माण में पारंपरिक एवं प्राकृतिक स्वरूप का विशेष ध्यान रखा जाता है। मूर्तिकारों का कहना है कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या प्रतिबंधित मूर्तियों का निर्माण नहीं किया जा रहा है, इसके बावजूद उन पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं।
मूर्तिकारों के अनुसार, दिनांक 28 जुलाई 2026 को हिन्दू नारायणी सेना के सदस्यों ने विभिन्न मूर्ति पंडालों एवं निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया था तथा अपने सिद्धांतों से संबंधित पर्चियां भी दी थीं। इस दौरान प्राकृतिक आसन एवं स्वरूप में आवश्यक सुधार करने की बात कही गई थी, जिसे मूर्तिकारों द्वारा अगले ही दिन सुधार दिया गया।
मूर्तिकारों का आरोप है कि सुधार किए जाने के बावजूद उन पर कार्टून मूर्तियां, बाल स्वरूप, एआई से संबंधित डिजाइन एवं पीओपी की मूर्तियां बनाने के आरोप लगाते हुए 4 अगस्त 2026 को जिला कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद मूर्तिकारों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न संगठनों के सदस्य, पंडितगण एवं हिन्दू नारायणी सेना के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था। मूर्तिकारों का कहना है कि बैठक में यह सवाल उठाया गया कि जब उनके द्वारा आपत्तियों के आधार पर आवश्यक सुधार कर दिए गए हैं, तब भी उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई एवं सजा की मांग करना कितना उचित है।
मूर्तिकारों के अनुसार, बैठक के बाद हिन्दू नारायणी सेना एवं मूर्तिकार समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने संयुक्त रूप से विभिन्न मूर्ति निर्माण स्थलों का निरीक्षण भी किया, लेकिन कहीं भी कोई आपत्तिजनक मूर्ति नहीं मिली। इसके बावजूद 23 अगस्त 2026 को मीडिया के माध्यम से मूर्तिकारों को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई एवं सजा की मांग किए जाने पर मूर्तिकारों ने नाराजगी व्यक्त की है।
मूर्तिकारों का कहना है कि वे अप्रैल माह से मूर्ति निर्माण का कार्य शुरू करते हैं और कई महीनों की मेहनत के बाद अगस्त-सितंबर तक मूर्तियां तैयार होती हैं। ऐसे में त्योहारों एवं सीजन के महत्वपूर्ण समय में बार-बार विवाद एवं शिकायतों के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार लगातार उन्हें परेशान किया गया तो समय पर ग्राहकों की मूर्तियां तैयार करना मुश्किल हो जाएगा। इससे उनकी तैयार मूर्तियां बिकने से रह सकती हैं, आर्थिक नुकसान होगा और पहले से लिए गए कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
