
कोरबा– गर्मी के मौसम में सब का गला तर करने वाला देसी फ्रिज, अपने मालिक की ही तरक्की नहीं कर पा रहा है। गर्मी की शुरुआत होते ही मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ गई है, लेकिन चिलचिलाती धूप में पसीना बहाने वाले कुम्हारों को उनकी मेहनत का सही मोल नहीं मिल पा रहा है। मटकों का निर्माण करने वाले कुम्हारों ने बताया कि पहले के समय में हर घर में मटका दिखाई देता था, पर अब आधुनिक युग के कारण मटकों की बिक्री काम हो चुकी है। गर्मी में मटकों को मांग होती है, लेकिन आधुनिक चीजों के कारण व्यापार पर काफी अधिक प्रभाव पड़ा है और धीरे-धीरे व्यापार भी खत्म होता जा रहा है। हमारा पूरा परिवार इसी व्यापार पर आश्रित है। इसमें जो भी कमाई होती है, उससे ही साल भर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कुम्हार ने बताया कि मटका बनाने के लिए आवश्यक मिट्टी, जलाऊ लकड़ी समेत अन्य चीजों की आवश्यकता होती है, जो आज के समय में काफी मुश्किल से उपलब्ध हो पाती है। उसके लिए भी उन्हें जूझना पड़ता है। कुम्हारों ने बताया कि अपनी आजीविका चलाने के लिए वे उपलब्ध संसाधन अनुसार खुद मटका तैयार करते हैं। वे अपनी मटके की दुकान सड़क किनारे लगाते हैं। जिसे नगर निगम द्वारा कई बार अतिक्रमण का हवाला देकर हटा दिया जाता है। जिससे उनके व्यापार में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
