कोरबा में आंगनबाड़ी निर्माण बना ‘मौत का ढांचा’! घटिया मटेरियल से बच्चों की ज़िंदगी पर सीधा खतरा


कोरबानगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 14 अमरैयापारा और चिमनी भट्ठा में बन रहे आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण अब बड़े घोटाले की शक्ल लेता नजर आ रहा है। जिन भवनों में मासूम बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए, वहां भ्रष्टाचार और लापरवाही की ऐसी नींव रखी जा रही है, जो कभी भी हादसे में बदल सकती है।
स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और पूर्व पार्षद टीकम राठौर के मुताबिक, निर्माण कार्य में गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार कर सस्ते और घटिया मटेरियल का खुला खेल खेला जा रहा है। आरोप है कि रेत, सीमेंट और ईंट जैसे बुनियादी निर्माण सामग्री तक में भारी अनियमितता बरती जा रही है—पुराने, जर्जर ईंटों और कमजोर सीमेंट से दीवारें खड़ी की जा रही हैं, जो देखने में ही असुरक्षित प्रतीत होती हैं।
बच्चों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़
यह वही आंगनबाड़ी केंद्र हैं जहां छोटे-छोटे बच्चे रोज आते हैं। ऐसे में इस तरह का लापरवाह और घटिया निर्माण सीधे-सीधे उनकी जान के साथ खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
‘मिलीभगत’ का खेल?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अब तक पूरी तरह खामोश हैं। न तो कोई निरीक्षण हुआ, न ही किसी तरह की ठोस कार्रवाई। इससे साफ तौर पर यह संदेह गहराता है कि कहीं न कहीं अधिकारियों और ठेकेदार के बीच सांठगांठ का खेल चल रहा है।
एक ठेकेदार, कई निर्माण, एक ही कहानी
आरोपों के घेरे में आए ठेकेदार हरिश्चंद्र दुबे पर यह भी आरोप है कि वह अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर एक-दो नहीं बल्कि करीब 20-22 आंगनबाड़ी केंद्रों का काम ले चुका है। और हर जगह एक जैसी कहानी—घटिया मटेरियल, नियमों की अनदेखी और मनमानी निर्माण।
जनता का आक्रोश
वार्डवासियों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर इस तरह का निर्माण करना सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि बच्चों की जान से सीधा खिलवाड़ है।
बड़ा सवाल:
जब बच्चों की सुरक्षा और भविष्य दांव पर हो, तो आखिर जिम्मेदार सिस्टम क्यों चुप है?
कब होगी निष्पक्ष जांच?
और कब कटघरे में खड़े होंगे दोषी?

स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।

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