
कोरबा- रेलवे स्टेशन के सेकेंड एंट्री पर पीने के पानी की सुविधा, वाशरूम, टायलेट-बॉथ रूम की सुविधा के साथ ही व्यवस्थित अनारक्षित टिकट घर का निर्माण कराया गया था। यात्रियों को टिकट के लिए मुख्य द्वार पर न जाना पड़े, इसलिए 3 काउंटर वाला टिकट घर बनाया था। टिकट घर के सामने फ्लोरिंग की थी, ताकि बारिश के समय कीचड़ से लोगों को परेशानी न हो। जमीन विवाद के कारण अब वहां केवल टिकट घर ही नजर आता है। बाकी सुविधाएं बंद सी हो गई है। पीने के पानी की नलें, टाइल्ट आदि तो वर्षों पहले ही चोरी हो गए। अब वहां सुविधा के नाम पर यात्रियों को उस रास्ते स्टेशन पहुंचने का मार्ग ही रह गया है।
सेकेंड एंट्री खुलने के कुछ वर्ष तक सब कुछ ठीक रहा। इसके बाद एसईसीएल प्रबंधन ने कोल डिस्पैच के लिए साइडिंग शुरू कर दिए। पहले एक तरफ साइडिंग खुली फिर दूसरी ओर भी खुल गया। सेकेंड एंट्री के बगल से गुजरे बायपास सड़क की मरम्मत नहीं होने से स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। उस पर हमेशा भारी वाहन कोयला लेकर दौड़ते हैं, जिससे पहले से परेशान यात्रियों को साइडिंग खुलने ने के बाद दोहरी परेशानी होने लगी है। परिणाम यह हुआ है कि पूरा क्षेत्र कोल डस्ट से पटा रहता है। इसे रोकने नाम के लिए पानी छिड़काव होता है। रेलवे स्टेशन में मानिकपुर पोखरी की ओर सेकेंड एंट्री का लोकार्पण 1 जून 2016 को हुआ था। सेकेंड एंट्री शहर की आधी से अधिक आबादी के लोगों को स्टेशन आने-जाने में होने वाली परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से बनाया था। तब जिन सुविधाओं को उपलब्ध कराया था, वह अब नहीं हैं। न ही सुविधाएं बढ़ाने अब रेल प्रबंधन पहल कर रहा है। स्थिति यह है कि जिस किसी भी हालत में है, उसी हालत में यात्रियों को उस रास्ते का उपयोग करने विवश किया जा रहा है। सुविधाएं नहीं बढ़ाने के पीछे का सच यह है कि जिस जमीन पर सेकेंड एंट्री बनी है, वह रेलवे की है ही नहीं। अर्थात उधारी की जमीन पर सेकेंड एंट्री का निर्माण कराकर रेल प्रबंधन स्वयं ही मुसीबत को गले लगा लिया है। इसके कारण न तो वहां सुविधाएं बढ़ा पा रहे हैं और न ही जो ढांचा यात्रियों के लिए तैयार कराया है, उसे सही सलामत रख पा रहे हैं। परिणाम यह हो रहा है कि सेकेंड एंट्री अब यात्रियों के लिए सुविधाजनक कम मुसीबतों वाला ज्यादा होकर रह गया है।
