
कोरबा– कमाऊपूत कोरबा आज भी कई ट्रेनों की सुविधा से वंचित है। भारी भरकम कमाई के बाद भी कोरबा की यात्री ट्रेनों के नाम पर उपेक्षा का क्रम जारी है।
हसदेव एक्सप्रेस (रायपुर), छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (अमृतसर), शिवनाथ एक्सप्रेस (नागपुर), लिंक एक्सप्रेस (विशाखापट्टनम) के अलावा न्यायधानी व राजधानी को जोडऩे वाली मेमू व पैसेंजर ट्रेनें ही हैं। कोरबा में रेल सेवा की शुरुआत वर्ष 1959-60 में हो गई थी। लेकिन आज तक कटनी रूट से सीधा कनेक्शन नहीं ट्रेनों को नहीं मिल पाया है। रायगढ़ रूट को जोडऩे बालपुर-सारागांव लाइन बने 9 साल हो चुके हैं, लेकिन यात्री ट्रेनों की शुरुआत नहीं हो पाई है। बिलासपुर जिले के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक धर्मजीत सिंह ने कोरबा-बीकानेर एक्सप्रेस शुरू करने की मांग बीते माह केन्द्रीय रेल मंत्री को पत्र लिखकर कर चुके हैं। जबकि राज्य सभा की सांसद फूलोदेवी नेताम कोरबा स्टेशन की पिटलाइन शुरू करने, कोरबा-बीकानेर एक्सप्रेस चालू करने समेत कोरबा-नई दिल्ली के बीच सीधी ट्रेन शुरू करने की मांग हाल ही में सत्र के दौरान कर चुकी हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को होने वाली आय का सर्वाधिक हिस्सा कोरबा से होता है। बीते साल की तरह इस वित्त वर्ष 2025-26 में भी माल परिवहन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड अगर एसईसीआर ने बनाया है तो वह संभव हुआ है कोरबा से ही। यात्री परिवहन से होने वाली आय की हिस्सेदारी जरूर कम रहती है। मगर कोल परिवहन से होने वाली रिकॉर्ड आय के बाद भी सुविधाओं के मामले में काफी पीछे चल रहे हैं। कोरबा का रेलवे से नाता 65 साल पुराना है, मगर सुविधाओं को देखा जाए तो किसी नए स्टेशन की तरह ही हैं। प्रदेश के बड़े शहरों में कोरबा का नाम भी अगली पंक्ति में लिया जाता है। इसका प्रमुख कारण यहां के निजी और सार्वजनिक संस्थान हैं, जहां हुए देश के कोने कोने से लोग रहते जीविका चला रहे हैं। लंबी दूरी की ट्रेनों के नहीं होने से सभी को परेशानी होती है।
