
कोरबा। इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारत गैस गेवरा प्रोजेक्ट कंज्यूमर्स को-आपरेटिव स्टोर्स लिमिटेड के चक्कर काटते-काटते उपभोक्ता परेशान हैं। उन्हें गैस सिलेंडर नसीब नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि एसईसीएल कर्मचारियों सहित आम उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है, जो कभी भी एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है ।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि सप्ताह में एक या दो बार ही गैस की गाड़ी आती है, लेकिन उसमें भी बड़े स्तर पर सिलेंडर की हेरा-फेरी हो रही है रसूखदारों और बिचौलियों की साठगांठ के कारण आम उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई दिनों से बुकिंग के बावजूद डिलीवरी न मिलना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गैस की अनुपलब्धता का सीधा असर चूल्हे-चौके पर पड़ा है। घर का खाना समय पर नहीं बन पा रहा है, जिससे कामकाजी कर्मचारियों और बच्चों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।आक्रोशित उपभोक्ताओं ने बताया कि गैस न मिलने के कारण उन्हें घर में अपनी गृह-लक्ष्मी की खरी-खोटी सुननी पड़ रही है जिससे पारिवारिक तनाव भी बढ़ रहा है।उपभोक्ताओं का कहना है कि एक तरफ गैस की कमी न होने की बात करते हैं लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। कोयलांचल की जनता पूछ रही है कि यदि गैस की कमी नहीं है तो महीनों इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? क्षेत्र की जनता और कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर गैस वितरण व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र में धरना, घेराव आंदोलन और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित गैस एजेंसी और स्थानीय प्रशासन की होगी ।
