खदान के पास तंबू लगाकर आंदोलन में डटे ग्रामीण, नराईबोध के विस्थापितों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू

कोरबाएसईसीएल की गेवरा परियोजना के अंतर्गत आने वाले ग्राम नराईबोध के विस्थापितों और ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार से खदान के समीप पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया
है। दो दिन पूर्व भठोरा फेस का काम बाधित करने के बाद ग्रामीणों ने पूर्व घोषित रणनीति के तहत आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है।
ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निराकरण नहीं होता, आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि विस्थापन के बदले मानक सुविधाओं के साथ बसाहट और भू-अर्जन का संपूर्ण मुआवजा तत्काल प्रदान किया जाए। प्रभावित परिवारों के सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्थाई रोजगार और पीएनसी कंपनी में वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की जाए। ग्राम में जीपीएस के माध्यम से जो नापी की गई है उसका सही और पारदर्शी मूल्यांकन कर मुआवजे का त्वरित निराकरण किया जाए। पार्षद अनिला राकेश पटेल ने कहा कि सालों तक अपनी जमीन विकास के नाम पर दी है, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है। अब उन्हें कागजी वादे नहीं जमीन पर अधिकार चाहिए। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, खदान के समीप अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन आंदोलन जारी रहेगा। पंडाल लगाकर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन की हीलाहवाली के कारण ग्रामीण अपने ही हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

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