गेवरारोड-पेंड्रारोड कॉरिडोर लाइन पर दिसंबर से दौड़ेंगी ट्रेनें, 90 फीसदी काम पूरा, 20 किमी ट्रैक चालू गेवरा, दीपका और कुसमुंडा खदानों से होगा सबसे ज्यादा कोयला डिस्पैच

कोरबा। बहुप्रतीक्षित गेवरारोड-पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। परियोजना का लगभग 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और अलग-अलग सेक्शन में तेजी से कार्य चल रहा है। प्रोजेक्ट कंपनी इसे इस वर्ष दिसंबर 2026 तक पूरा कर चालू करने की तैयारी में है। फिलहाल करीब 20 किलोमीटर ट्रैक पर ट्रेनें चलना शुरू हो चुका है।
अधिकारियों के अनुसार एक सेक्शन मार्च तक और दूसरा जून तक तैयार हो जाएगा, जबकि शेष हिस्सों का काम दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट में एसईसीएल की भागीदारी 64 फीसदी, इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की 26 फीसदी और छत्तीसगढ़ ईस्ट-वेस्ट रेलवे लिमिटेड – की 10 फीसदी भागीदारी है।
कॉरिडोर रेल लाइन की शुरुआत खरसिया से हुई है, जो धरमजयगढ़, पेलमा, उरगा और कुसमुंडा होते हुए गेवरारोड में आकर मिलती है। इसके बाद दूसरा चरण गेवरारोड से पेंड्रारोड तक बनाया जा रहा है। इस सेक्शन की मूल लंबाई 135 किलोमीटर है, लेकिन कुछ स्थानों पर अतिरिक्त लाइन जोड़े जाने से परियोजना की कुल लंबाई 155 किलोमीटर हो गई है। पूरे सेक्शन में रेल लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है और इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य अंतिम चरण में है। यह परियोजना 2020 में करीब 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई थी। बाद में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने क्षेत्र में वाइल्ड कॉरिडोर बनाने के निर्देश दिए, जिसके कारण काम कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। इसके बाद परियोजना को संशोधित किया गया और लागत 2500 करोड़ रुपए बढ़कर 12,500 करोड़ रुपए हो गई। वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए पूरी लाइन में 16 अंडरपास और 4 ओवरपास बनाए गए हैं।यह रेल कॉरिडोर मुख्य रूप से एसईसीएल की खदानों से कोयले के परिवहन के लिए बनाया जा रहा है। इसके चालू होने पर कोरबा क्षेत्र की खदानों से हर साल लगभग 180 मिलियन टन कोयले का डिस्पैच संभव होगा। इसमें गेवरा (70 मिलियन टन), दीपका (40 मिलियन टन), कुसमुंडा (62.5 मिलियन टन) और मानिकपुर (5.25 मिलियन टन) सहित अन्य खदानों की उत्पादन क्षमता शामिल है। रायगढ़ क्षेत्र में फिलहाल इस कॉरिडोर से करीब 15 मिलियन टन कोयले के परिवहन की अनुमति है। भविष्य में नई खनन परियोजनाओं और विस्तार के बाद 2034-35 तक यह क्षमता 50 मिलियन टन से अधिक हो सकती है। गेवरारोड से लेकर पेंड्रारोड तक कॉरीडोर रेल लाइन में कुल 12 सेक्शन हैं। इनमें से सबसे बड़ा सेक्शन पुटीपखाना से भाड़ी तक 27.22 किलोमीटर और सबसे छोटा 7 किलोमीटर का सेक्शन गेवरारोड से सुराकछार तक है। एक सेक्शन पुटुवा से माटिन तक भी 7.2 किलोमीटर का है। गेवरारोड से सुराकछार, कटघोरा, भिंगरा, पुटुवा, माटिन, सिंदूरगढ़, पुटीपखना, भांडी, धनगवां होते हुए पेंड्रारोड तक 12 सेक्शन हैं।

कटघोरा-डोंगरगढ़ लाइन का काम लेआउट विवाद में अटका
कटघोरा से डोंगरगढ़ तक 259 किलोमीटर लंबी नई कॉरिडोर रेल लाइन को वर्ष 2018 में मंजूरी मिली थी, लेकिन लेआउट को लेकर आपत्तियों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। पहले इसे मुंगेली-डोंगरगढ़ लाइन के रूप में स्वीकृति मिली थी, बाद में योजना बदली गई। इस परियोजना का निर्माण छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को करना है।
18 किमी में डीजल इंजन का पहला ट्रायल पूरा
गेवरारोड से पेंड्रारोड तक निर्माणाधीन 135 किमी लंबी कॉरीडोर रेल लाइन के पहले सेक्शन पर डीजल इंजन से ट्रायल लिया गया। गेवरारोड-कटघोरा 18 किमी लंबी नई पटरी का परीक्षण सफल रहा। इलेक्ट्रिकल विभाग का काम अभी अधूरा होने के कारण फिलहाल डीजल इंजन से ट्रायल किया गया। दो दिन बाद कॉरिडोर लाइन के दूसरे सिरे, पेंड्रारोड-भाड़ी 24 किमी सेक्शन में ट्रायल लिया जाएगा। इस ट्रायल के बाद कुल 93 किमी लंबा सेक्शन ट्रायल के लिए बाकी रह जाएगा। अधिकारियों और कंपनी के टेक्नीकल एक्सपर्ट इस परीक्षण में मौजूद रहे। पूरी लाइन को इस वर्ष दिसंबर तक चालू करने का लक्ष्य है। गेवरारोड-पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर दो सेक्शन में तैयार है। पहले सेक्शन पर डीजल इंजन से पटरी का परीक्षण कर रेलवे की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इलेक्ट्रिकल सेक्शन के पूरा होते ही इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रायल लिया जाएगा और शेष सेक्शन भी जल्द तैयार किया जाएगा।

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