
कोरबा– गेवरा प्रोजेक्ट स्थित कन्ज्यूमर्स को-ऑपरेटिव स्टोर्स लिमिटेड (भारत गैस एजेंसी) में स्थिति उस वक्त अनियंत्रित हो गई जब पिछले पखवाड़े भर से रसोई गैस की किल्लत झेल रहे सैकड़ों उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बुकिंग के 15 दिन बाद भी सिलेंडर न मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने एजेंसी परिसर में जमकर नारेबाजी की और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए ।
प्रदर्शन कर रहे उपभोक्ताओं ने डिजिटल इंडिया के दावों और धरातल की हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करते हुए आरोप लगाए। उपभोक्ताओं का कहना है कि 15 दिनों से सिलेंडर बुक होने के बावजूद न तो होम डिलीवरी हो रही है और न ही एजेंसी से सिलेंडर मिल रहा है। एजेंसी के सूचना पटल पर स्टॉक या वितरण संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की जा रही है, जिससे कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं को अपना काम छोड़कर प्रतिदिन चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप और सूचना पटल पर प्रतिदिन यह स्पष्ट किया जाए कि कितने सिलेंडर आए हैं और किन उपभोक्ताओं को वितरित किए जाएंगे। हंगामे के बीच एजेंसी कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी के कारण मुख्य डिपो में अग्रिम राशि जमा नहीं हो पा रही है इस वजह से डिपो से पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर लोड नहीं हो पा रहे हैं और मांग व आपूर्ति के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो गई है। हाल ही में 7 अप्रैल को हुए चुनावों के बाद नवगठित कमेटी के अध्यक्ष जनाराम कर्ष ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को कहा कि मेरे कार्यभार संभालने के बाद किसी भी उपभोक्ता को परेशान नहीं होना पड़ेगा। गैस सिलेंडर की निर्बाध आपूर्ति और समय पर डिलीवरी मेरी पहली प्राथमिकता है। पिछले 10 वर्षों में जो भी खामियां रही हैं उन्हें दुरुस्त किया जाएगा और एक पारदर्शी वितरण प्रणाली लागू की जाएगी।उपभोक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और दैनिक अपडेट के लिए रोस्टर प्रणाली शुरू नहीं की गई तो वे प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ और भी आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
