फसलों को यूरिया के ओवरडोज से बचाने पर फोकस, चलाया जा रहा संतुलित उर्वरक उपयोग विशेष अभियान

कोरबाजिले में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए खेती-किसानी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार विभाग का मुख्य फोकस फसलों को ओवरडोज से बचाने पर है। जिले में अप्रैल से अगस्त तक संतुलित उर्वरक उपयोग विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसका मकसद किसानों को यूरिया और डीएपी के अंधाधुंध इस्तेमाल से रोककर वैज्ञानिक तरीके से खाद डालने के लिए प्रेरित करना है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसान अधिक पैदावार के लालच में यूरिया और डीएपी का असंतुलित उपयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों का बैलेंस बिगड़ रहा है और लंबे समय में जमीन की उर्वरा शक्ति
खत्म होने का खतरा है। इसी के मद्देनजर अब मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खेती करने की सलाह दी जा रही है। किसानों को बताया जा रहा है कि केवल यूरिया-डीएपी ही नहीं, बल्कि एनपीके, कॉम्प्लेक्स और एसएसपी का सही मिश्रण फसल के लिए जरूरी है। चावल आधारित फसलों में यदि पिछली फसल में फास्फोरस डाला गया है, तो इस बार उससे बचने की सलाह दी गई है। इससे लागत घटेगी और मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा। मिट्टी में दबे हुए पुराने फास्फोरस को सक्रिय करने के लिए फास्फोरस सॉल्युबलाइजिंग बैक्टीरिया के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक खाद के साथ नील-हरित शैवाल, जैव उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों के इस्तेमाल के लिए ग्राम स्तर पर शिविर लगेंगे। जिले की सभी सहकारी समितियों में पोस्टर और बैनर के जरिए जागरूकता फैलाई जा रही है। कृषि विभाग के मैदानी अमले को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीधे खेतों तक पहुंचकर किसानों को समझाएं कि जितनी जरूरत, उतनी खाद ही बेहतर मुनाफे का मंत्र है। अधिकारियों के अनुसार मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद डालने से न केवल फसल की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि खेती की लागत में भी भारी कमी आती है। किसान डीएपी के पीछे भागने के बजाय एसएसपी और जैव उर्वरकों को अपनाएं। इसके लिए ही किसानों को जागरूक कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *